Saturday, May 29, 2010

उसकी कमी खलती रहेगी


आज यूँ ही कोंई छोड गया अधूरे सपनो के साथ ,
आखो मे आसूंवों का सयलाब और मै उन्हें छुपाने को बेताब
चेहरे पर कई सवाल और एक सुर्ख निराशा ,
आखों के सामने घूमता वो यादों का मंजर ,
वो हर बात पर लड़ना उसका और
अपने बात पर अड़े रहना उसका ,
वो दादी -नानी की तरह हर बात का जबाब ,
वो उसका हर बात पर दिल तोडना ,
मेरा हर बार उसे मजबूती से जोड़ना ,
वो हर दिन मेरे जाहेन में समता उसका चेहरा
आज मेरी आसूंवों की बाढ़ भी खोने का नाम नहीं ले रहा ,
ये तो जिन्दगी है कटती रहेगी पर, हा उसकी कमी खलती रहेगी

Sunday, May 9, 2010

सिर्फ माँ है और कोई नहीं


रिश्तों की रफूगर वो है एक जादूगर ,
वो खुसिएँ तिनका तिनका कर जोडती है ,
वो गम सूखी लकड़ी के तरह तोडती है,
वो बददूआयें सरे फूक देती है चूल्हे मे,
उसके आचल मे समाया है सूकून का हर साजो-सामान ,
उसकी डाट,उसका प्यार,उसकी लाड ,उसका दुलार ,
न सवाल ,न जबाब ,उसका प्यार बेहिसाब ,
सबका गम लेते आयी है वो अपने हिस्से ,
और बेताब रहती है खुसियाएँ बाटने को सबको ,
हमारी तोतली बोली सायानी हो गयी ,
घुटनों के बल चलने वाला बच्चा सा मै,
अब भागता हूँ इस बनावटी दुनिया मे ,
अपने पेरों पर..
पर उसके प्यार का बचपना आज भी तोतली बोली बोलता है ,
वो चूमती है मेरा माथा ,
जब मे निकलता हूँ घर से कहीं जाने को ,
कमर थोड़ी झुक गयी है ,
पर वो आज भी गोद मे उठा लेना चाहती है मुझे ,
वो सिर्फ माँ है और कोई नहीं ,
और उसके बिना ये दुनिया कुछ नहीं ....